शादी की पहली रात, हर लड़की के लिए एक सपना होता है। आज की रात मेरे लिए भी बहुत खास थी। सारी रसमें-कसमें सब पूरी हो गयी। खैर सास-ससुर की तरह एक ओर माता-पिता मिल गए। अवधेश का घर ही मेरे लिए सब कुछ है। बहुत ज्यादा थकावट होने के कारण मैं अपने रूम में चली गई। उस रात इंतज़ार कर रही थी अवधेश की सॉरी का....
हम दोनों बेड के अलग-अलग किनारे पर लेट गए। मैंने लाईट ऑफ कर दी, नींद तो आने से रही। बार-बार करवटें बदल रहे थे, लेकिन दोनों में से एक की भी हिम्मत ना हुई एक-दूसरे की तरफ देखने की।
(शादी से पहले उसने जो ना मिलने की गलती की थी, इस बात के लिए मैं अवधेश से नाराज थी)
"सुबह के चार बज गए थे"
मैं भी हार मानने वालों में से ना थी। उसकी तरफ देखकर लगता कि ये सो गए। मैं अवधेश को बोलना चाहती थी कि तुमसे कितना प्यार करती हूँ। (मैं मन ही मन) फिर वो सोचेगा शारीरिक चाह है, इसलिए ये ऐसा कर रही है। खुद को समझाया कि जब तक ये सॉरी नहीं बोलेगा तब तक दूर रहना है।
मम्मी आवाज लगाती हैं अवधेश... सात बज गए हैं।
दरवाजा खोलने से पहले अवधेश ज़रा चेहरा उठाकर और मैं थोड़ा झुककर एक दूसरे के होठ को चूमते हैं।
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